बुधवार, 5 नवंबर 2014

आत्मबल महोत्सव - एक लाईफटाईम मेगा इवेंट

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 5:26 pm कोई टिप्पणी नही
यह नंदाई के अविरत परिश्रम है जिसने सारे आत्मबल सखियों को हर कोने से एकत्रित करके उन्हें फिरसे एक बार उनके जीवन में वह आनंदित क्षण अनुभवने का सुनहरा मौका प्रदान किया । आत्मबल महोत्सव के जरीयें । आत्मबल महोत्सव यह एक ऐसा उत्सव है जिसने हर आत्मबल सखी के आयुष्य के सुखद और आनंदपूर्ण पलों को फिर से संजोया है। एक ऐसा मंच जिसने १५०० स्त्रियों को शामील किया, जहा उम्र कि कोई सीमा नहीं थी सिर्फ दृढ निश्चय और प्रेम यही प्रमाण था। महोत्सव कि शामें सही मायने में अपने उल्ल्खनिय तालिम के साथ प्रसन्न भी थी ।

हमें यह बताने में बहुत खुशी हो रही है कि आज आत्मबल महोत्सव को ३ साल पुते हो हुए है - नव्हंबर ५, २०१४ और नव्हंबर ६, २०१४.

तो चलिए नंदाई के इस प्यार के खजाने में हम घुलमिल जाते है।







आत्मबल महोत्सव का एक विशेष व्हिडीओ विनायकसिंह खापरेव्दारा एडिटेड्‍

गुरुवार, 25 सितंबर 2014

आत्मबल परिचय

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 3:15 am कोई टिप्पणी नही


आत्मबल क्यों? किस लिये?

आज हम ‘आत्मबल-आतंरिक शक्ति’ नामक ब्लॉग आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं। इस ब्लॉग के जरिये 'आत्मबल' नाम के उपक्रम की जानकारी और उससे जुडी हुई जानकारी पेश की जायेगी। यह उपक्रम डॉ. नंदा अनिरुद्ध जोशी (इनके संपर्क में आनेवालीं महिलाएं प्राय: इन्हें प्रेम से 'नंदाई' कहकर बुलाती हैं) के द्वारा संचालित किया जा रहा उपक्रम है और 'श्री साई समर्थ विज्ञान प्रबोधिनी' नामक संस्था के साथ वे इसका आयोजन करती हैं। सन २०१४ में 'आत्मबल' उपक्रम ने १४ साल पूरे किये और १५वे साल में प्रवेश किया है।

'आत्मबल' नाम में ही सबकुछ है।

'आत्मबल' का अर्थ है महिलाओं में अंतर्निहित आंतरिक शक्ति - ऐसी शक्ति जो हर नारी में होती तो है, परंतु हर नारी को इसे महसूस करना पड़ता है, ऐसी शक्ति जिससे परिचित होने के लिए कभी कभी उसे प्रयास करने पड़ते हैं, ऐसी शक्ति जो उसके भीतर, मन की गहराई में छुपी हुई होती है और यह प्रयास शुरू करने के बाद धीरे धीरे वह उसके व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाती है और कुछ अरसे बाद वह शक्ति उसका व्यक्तित्व ही बन जाती है।

.......... क्योंकि आत्मबलविकास यह किसी भी बाहरी उपायों से नहीं, बल्कि भीतर से ही हो सकता है, यह हमारा दृढ विश्वास है।

..........और इसीलिए यह ब्लॉग है, 'नंदाई के द्वारा हर महिला के लिए आगे बढ़ाया हुआ प्रेम और मित्रता का हाथ.……हर उस महिला को स्वयं से परिचित कराने हेतु जो प्रयास किए जा रहे हैं, उन प्रयासों की आनंदयात्रा में उसे शामिल कराने के लिए यह एक पुकार है। नारी को जब अपनी क्षमताओं का पता चलता है तब उस में आत्मविश्वास और उत्साह जाग जाते हैं और अब जीवन को देखने की उसकी दृष्टि ही बदल चुकी होती है.………इसलिए अब उसका जीवन ही बदल जाता है।       

 …क्योंकि बदलाव अंदररूनी ही होना चाहिए।


महिला, चाहे वह बेटी, पत्नी या माँ किसी भी भूमिका में हो - उसका महत्त्वपूर्ण योगदान पारिवारिक तानाबाना मजबूत करने में, बच्चों का व्यक्तित्व निखारने में अर्थात एक सशक्त समाज बनाने में होता है। परंतु इसके लिए वास्तव में उसे अपनी शक्ति की, सकारात्मकता की और प्रेम का आदानप्रदान करने की क्षमता का एहसास होना चाहिए। .......... क्योंकि आप वही दे सकते हो जो आप के पास है।

तो यह ‘आत्मबल’ course है क्या ?

ऊपरोक्त सभी बातों का विचार करके ही डॉ. नंदा अनिरुद्ध जोशी ने बड़ी मेहनत से यह कोर्स डिज़ाइन किया है। प्रति सप्ताह एक सत्र इस तरह ६ महीनों तक यह कोर्स चलता है।

किसी भी विषय के लिए विशिष्ट नाटिका, चर्चासत्र, प्रोजेक्ट्स और अन्य प्रस्तुतीकरण आदि बातें इस कोर्स का भाग होती हैं, जिसके अध्ययन से एक तरफ इस कोर्स की छात्राएं बाहरी विश्व के संपर्क में आती हैं, तो दूसरी तरफ उनका स्वयं से संवाद भी होने लगता है। हर वर्ष भले ही इस कोर्स का बुनियादी स्वरूप एक सा ही प्रतीत होता हो, मगर फिर भी हर वर्ष की थीम ताज़ा मुद्दों पर आधारित भिन्न भिन्न होती है।

सुनियोजित जीवनप्रणाली हमेशा सुखदाई एवं उचित होने की वजह से इस कोर्स में अन्य कुशलताओं के साथ साथ समय का सही उपयोग (टाइम मैनेजमेंट) करने की कला, जिस में घर तथा ऑफिस दोनों का समन्वय करने में महिला को जीतोड़ मेहनत करनी पड़ती है, उस में संतुलन बनाए रखने में, एक ही समय में हो सकनेवाले कई कार्य सुचारू रूप से कैसे किए जाएं (मल्टीटास्किंग) इस बारे में विशेष मार्गदर्शन किया जाता है।

आज के दौर में हर तरफ व्यवहारिक स्तर पर तथा व्यक्तिगत स्तर पर सबसे ज्यादा प्रचलित अंग्रेजी भाषा के असाधारण स्थान को ध्यान में रखते हुए अंग्रेजी में बातचीत करना संभव हो सके यह केवल समय की मांग नहीं है, बल्कि एक जरूरी हुनर माना जाता है। अंग्रेजी में प्रवाही रूप से बातचीत कर सकने से आत्मविश्वास बढ़ता है। इस बात को ध्यान में रखकर इस कोर्स में अंग्रेजी में बातचीत करने पर जोर दिया जाता है। जिन महिलाओं का अंग्रेजी से कभी पाला नहीं पड़ा हो उनके लिए बालबोध बातचीत से शुरुआत की जाती है। तो जिन महिलाओं को अंग्रेजी की जानकारी है, पर बोलने की आदत नहीं होती, उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाता है।

कोर्स की संपन्नता में एक शाम को गीत, संगीत एवं अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस कार्यक्रम में इस कोर्स की सभी छात्राएं - उम्र, व्यवसाय आदि चाहे कुछ भी हो- भाग लेती हैं। इसका उद्देश्य यही होता है, छात्राओं के मन में छिपे न्यूनगंड (इन्फिरियॉरिटी कॉम्प्लेक्स ) और स्टेज फियर दूर करना।   

डॉ.  नंदा अनिरुद्ध जोशी स्वयं निजी रूप से प्रत्येक सत्र का संचालन करती हैं और हर वर्ष के कोर्स का पाठ्यक्रम बनाने में भी उनकी सक्रिय भूमिका होती है। इतना ही नहीं बल्कि, हर वर्ष के कोर्स के अंत में जो कार्यक्रम पेश किया जाता है, उस में प्रस्तुत होनेवाली नाटिकाएं और अन्य बातों का वे ही निर्देशन करती हैं।

इस कोर्स की प्रवेशप्रक्रिया बहुत आसान है। केवल एक फॉर्म भरना होता है और तत्पश्चात हर इच्छुक छात्रा को व्यक्तिगत रूप से बुलाने के बाद ही उस वर्ष की बैच का चयन किया जाता है।

'आत्मबल' कोई महिला-मुक्ति आंदोलन नहीं है.……बिलकुल भी नहीं है। बल्कि महिला और उसके परिजनों को और रिश्तेदारों को ख़ुशी मिले और उसके व्यक्तित्व का विकास हो, इस हेतु के लिए ही 'आत्मबल' है।

यहाँ पर महिलाएं 'स्व' की खोज करने की यात्रा की शुरुआत करती हैं और वह खोज तो जीवन भर चलती रहती है..........अब 'आत्मबल' उसके साथ और उसके अंतरंग में छा जाने की वजह से यह यात्रा हर कदम पर अधिकाधिक सुहानी होती जाती है।

……क्योंकि, 'आत्मबल' का अर्थ है जीवन की ओर, जग की ओर तथा खुद अपनी ओर देखने का सही दृष्टिकोण।

'आत्मबल' में शामिल होनेवाली सभी महिलाओं में अपनापन निर्माण होता है - स्वयं अपने साथ और अन्य छात्राओं के साथ भी। पर अपने हाथ में दूसरी का हाथ थामकर कितनी भी बड़ी जंजीर क्यों न बन जाए फिर भी अंतिम महिला का एक हाथ खुला होता है - और एक सहेली का हाथ थामने के लिए !

चलिए तो फिर, हाथों में हाथ लिये.………सद्गुरु और हमारी शक्ति का प्रमुख स्रोत बड़ी माँ (महिषासुरमर्दिनी) का हम पर जो प्रेम है, उसका निरंतर एहसास रखते हुए उनके प्रति कृतज्ञ रहें - अंबज्ञ रहें। 


ll हरि ॐ ll ll श्रीराम ll ll अंबज्ञll

हमारी नंदाई

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 3:10 am कोई टिप्पणी नही

 

पिछले कई सालों से डॉ. श्रीमति नंदा अनिरुद्ध जोशी ’आत्मबल विकास’ नामक महिलाओं का आत्मविश्वास तथा आतंरिक शक्ति बढ़ानेवाला उपक्रम सफलतापूर्वक चलाती आ रही हैं। उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से बायोकेमिस्ट्री में पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) डिग्री हासिल की है और आयुर्वेद एवं प्राकृतिकोपचार (नैचुरोपैथी) में भी वे निपुण हैं। उन्होंने ब्रेल भाषा में भी प्रवीणता हासिल की है तथा उन्होंने स्वयं ३ साल ब्रेल भाषा का प्रशिक्षण दिया है।

उन्हीं के मार्गदर्शन अनुसार चलाए जानेवाले आत्मबल क्लास (वर्ग) महिलाओं की आंतरिक शक्ति तथा आत्मविश्वास का विकास इन दोनों गुणों को दृढ करते हैं और इससे महिलाओं को निडर, स्वावलम्बी तथा आत्मनिर्भर बनाने में सहायता से उन्हें अपनी खुदकी नई पहचान कराती हैं।

जिन महिलाओं को अंग्रेजी का थोडासा भी ज्ञान नहीं होता वे भी अपने रोजमर्रा के जीवन में अपने व्यवहार अच्छी तरह से कर पाएं इतनी अंग्रेजी डॉ. श्रीमति नंदा अनिरुद्ध जोशी स्वयं उन्हें सिखाती हैं। इससे उन महिलाओं को अंग्रेजी में बातचीत करने का आत्मविश्वास प्राप्त होता है और उन में से कुछ महिलाएं हज़ारों की संख्या में उपस्थित श्रोताओं के समक्ष अंग्रेजी नाटक भी पेश करती हैं।

आज के दौर में अंग्रेजी केवल सीखने की भाषा नहीं रही बल्कि अब यह आम लोगों की एकदूसरे से वार्तालाप की भाषा बन चुकी है। इसलिए अंग्रेजी का कामचलाऊ ज्ञान तो सभी के लिए आवश्यक है ही, परन्तु एक तरफ प्रवाही अंग्रेजी में बोल न सकने की वजह से हीनभावना और दूसरी तरफ शब्दकोष में मुश्किल शब्दों के अर्थ ढूंढने की बोरियतवाले कामों जैसे कई बातों की जरुरत होते हुए भी अंग्रेजी में बातचीत करना तथा प्राप्त ज्ञान का वर्धन करने से हम दूरी बनाए रखते हैं।

कई सालों के आत्मबल क्लास के संचालन के अनुभव से ही इन सभी दिक्कतों पर मात करनेवाली एक बहुत ही सुन्दर संकल्पना डॉ. श्रीमति नंदा अनिरुद्ध जोशी को सूझी और अथक प्रयास एवं मेहनत से उन्होंने इस संकल्पना को किताब के रूप में साकार किया।

आत्मबल का? कशासाठी?

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 3:05 am कोई टिप्पणी नही


आत्मबल - आंतरिक शक्ती

आज ह्याद्वारे ’आत्मबल-आंतरिक शक्ती’ हा ब्लॉग आपल्यासमोर प्रस्तुत होत आहे. ह्या ब्लॉगमध्ये ’आत्मबल’ हेच नाव असलेल्या एका उपक्रमाची माहिती व त्यासंबंधी ताज्या घडामोडी दिलेल्या असतील. हा उपक्रम डॉ. (सौ.) नंदा अनिरुद्ध जोशी (ह्यांच्या संपर्कात आलेल्या असंख्य स्त्रिया प्रेमाने त्यांना ’नंदाई’ हाक मारतात) ह्यांनी तयार केला असून ’श्री साई समर्थ विज्ञान प्रबोधिनी’ ह्या संस्थेच्या विद्यमाने त्या ह्याचे आयोजन करतात. २०१४ साली ’आत्मबल’ उपक्रमाने १४ वर्षे पूर्ण करून १५व्या वर्षात पदार्पण केले आहे.

’आत्मबल’ ह्या नावातच सर्व काही आहे.

’आत्मबल’ म्हणजे स्त्रियांमध्ये उपजतच असलेली आंतरिक शक्ती – अशी शक्ती जी प्रत्येक स्त्रीमध्ये असली, तरी प्रत्येक स्त्रीला त्याची जाणीव व्हावी लागते, अशी शक्ती जिच्याशी ओळख होण्याकरिता कधीकधी स्त्रीला प्रयास करावे लागतात, अशी शक्ती जी तिच्या आत खोल मनाच्या गाभ्यामध्ये दडून राहिलेली असते व हे प्रयास सुरू झाल्यानंतर हळूहळू तिच्या व्यक्तिमत्त्वाचा भाग बनते व कालांतराने ती शक्ती तिचे व्यक्तिमत्त्वच बनते.

....कारण आत्मबलविकास हा कुठल्याही बाह्य उपायांपेक्षाही आतूनच होऊ शकतो, असा आमचा ठाम विश्वास आहे.

....आणि म्हणूनच हा ब्लॉग म्हणजे ’नंदाई’ने प्रत्येक स्त्रीकरिता पुढे केलेला प्रेमाचा व मैत्रीचा हात आहे.... त्या प्रत्येक स्त्रीला स्वत:ची ओळख पटावी ह्याकरिता चाललेले हे जे प्रयास आहेत, त्या प्रयासांच्या आनंदयात्रेत तिला सहभागी करून घेण्याकरिता घातलेली एक साद आहे. स्त्रीला तिच्यातील क्षमतांचा शोध लागला की तिच्यामध्ये जागृत झालेल्या आत्मविश्वासाने व उत्साहाने ती आयुष्याकडे बघायला लागते, मात्र आता आयुष्याकडे बघायची तिची दृष्टी बदललेली असते....त्यामुळे आता तिचे आयुष्यच बदलून जाते.

....कारण बदल हा आतूनच घडावा लागतो.

स्त्री, मग ती मुलगी, पत्नी वा आई अशा कुठल्याही भूमिकेत असो – ती कौटुंबिक धागे मजबूत करण्यामध्ये, मुलांची व्यक्तिमत्त्वे घडविण्यामध्ये म्हणजेच पर्यायाने सशक्त समाज घडविण्यामध्ये महत्त्वाची भूमिका बजावते. मात्र त्याकरिता मुळात तिला स्वत:मधील शक्तीची, सकारात्मकतेची आणि प्रेम देऊ व घेऊ शकण्याच्या ताकदीची जाणीव झाली पाहिजे.
....कारण तुमच्याकडे जे आहे, तेच तुम्ही देऊ शकता.

तर असा हा ’आत्मबल’ कोर्स आहे तरी काय?

हा सगळा विचार करूनच डॉ. (सौ.) नंदा अनिरुद्ध जोशी ह्यांनी अतिशय मेहनतीने हा कोर्स तयार केलेला आहे. दर आठवड्याला एक सत्र, असे ६ महिने हा कोर्स चालतो. एखाद्या विषयाला वाहिलेली छोटी नाटुकली, चर्चासत्रे, प्रोजेक्टस आणि प्रेझेंटेशन्स अशा गोष्टी ह्या कोर्सचा भाग असतात; ज्यांचा अभ्यास करता एकीकडे ह्या कोर्सच्या विद्यार्थिनींचा बाह्य जगाशी संपर्क साधला जातो, तर दुसरीकडे त्यांचा स्वत:शीच संवादही सुरू होतो. कोर्सचे मूलभूत स्वरूप जरी दरवर्षी तेच असले, तरी दरवर्षी थीम मात्र प्रासंगिक महत्त्वाच्या मुद्यानुसार वेगवेगळी असते.

सुनियोजित जीवनशैली ही नेहमीच सुखप्रद व सुविहित असल्याने, ह्या कोर्समध्ये इतर कौशल्यांबरोबरच, वेळेचा सदुपयोग (टाईम मॅनेजमेंट) करण्याची कला, ज्यामध्ये घर व ऑफिस हे दोन्ही सांभाळण्यात स्त्रीची जी तारेवरची कसरत होत असते, त्यामध्ये संतुलन कसे मिळवावे, एका वेळेला होऊ शकणारी अनेक कामे प्रभावीपणे कशी करावीत (मल्टीटास्किंग), ह्या बाबतीत विशेष मार्गदर्शन केले जाते.

सध्याच्या युगात सर्वत्र व्यावहारिक पातळीवर व वैयक्तिक पातळीवरही सर्वात जास्त प्रचलित असलेल्या इंग्रजी भाषेचे अनन्यसाधारण स्थान लक्षात घेता, इंग्रजीमध्ये संभाषण करता येणे ही केवळ गरजच नव्हे, तर तो एक आवश्यक गुण मानला जातो. अस्खलित इंग्रजीमध्ये संभाषण करता येण्याने जगात वावरताना आत्मविश्वास वाढतो. हे ध्यानात घेऊन ह्या कोर्समध्ये इंग्रजी संभाषणावर विशेष भर दिला जातो. ज्या स्त्रियांना इंग्रजीचा गंधही नाही त्यांच्यासाठी बाळबोध संभाषणांपासून सुरुवात केली जाते. तर ज्या स्त्रियांना इंग्रजी भाषेची ओळख आहे, पण सराव नसल्यामुळे बोलता येत नाही, त्यांना त्यानुसार आवश्यक ते प्रशिक्षण दिले जाते.

कोर्स संपताना एका सायंकाळी संगीत व अन्य कार्यक्रमांच्या सादरीकरणाचे आयोजन केले जाते. ह्या कार्यक्रमात ह्या कोर्सच्या सर्व विद्यार्थिनी – वय, व्यवसाय आदिंविषयी कुठलाही अपवाद न करता – भाग घेतात. आपल्यात काहीतरी कमी आहे ह्या गैरसमजुतीपोटी ह्या स्त्रियांना आलेल्या न्यूनगंडावर व स्टेजफीअरवर त्यांना मात करता यावी हा ह्यामागील उद्देश असतो.

डॉ. (सौ.) नंदा अनिरुद्ध जोशी स्वत: जातीने हजर राहून प्रत्येक सत्राचे संचालन करतात व दर वर्षीचा कोर्स अभ्यासक्रम तयार करण्यामध्येही त्यांचा सक्रिय सहभाग असतो. इतकेच नव्हे, तर दर वर्षीच्या कोर्सच्या अखेरीस हा जो कार्यक्रम सादर होतो, त्यात प्रस्तुत होणाऱ्या नाटुकल्या व अन्य सादरीकरणांचे दिग्दर्शनही त्या करतात.

ह्या कोर्सची प्रवेशप्रक्रिया खूप सोपी आहे, केवळ एक फॉर्म भरून देणे आवश्यक आहे. त्यानंतर प्रत्येक इच्छुक विद्यार्थिनीशी वैयक्तिकरित्या बोलल्यानंतरच त्या वर्षीची बॅच निवडली जाते.

’आत्मबल’ ही काही स्त्री-मुक्ती चळवळ नव्हे....नक्कीच नव्हे. तर स्त्रीला व तिच्या कुटुंबाला आणि आप्तांना आनंदाची प्राप्ती होण्यासाठी जो तिचा व्यक्तिमत्त्व विकास व प्रगती होणे आवश्यक आहे, त्याकरिताच ’आत्मबल’ आहे.

इथे स्त्रीच्या, ’स्व’चा शोध घेण्याच्या प्रवासाची सुरुवात होते व तो जन्मभर चालतो....आता ’आत्मबल’ तिच्या पाठीशी, तिच्या बरोबर व तिच्या अंतरंगातच असल्याने हा प्रवास प्रत्येक पावलाला अधिकाधिक सुंदर होत जातो.

....कारण ’आत्मबल’ म्हणजे जीवनाकडे, जगाकडे, इतकेच नव्हे तर स्वत:कडेदेखील बघण्याचा उचित दृष्टिकोन!

’आत्मबल’मध्ये सहभागी झालेल्या सर्व स्त्रियांमध्ये जिव्हाळ्याचे बंध निर्माण होतात – स्वत:बरोबर व त्यांच्याबरोबर सहभागी झालेल्या सह-विद्यार्थिनींबरोबरदेखील.  मात्र आपल्या हातात दुसरीचा हात पकडून कितीही मोठी साखळी तयार केली तरी साखळीतील शेवटचीचा एक हात नेहमीच मोकळा असतो – अजून एकीचा हात धरण्यासाठी!

चला तर मग, हातात हात गुंफूया....सद्गुरुंच्या व आपल्यासाठी शक्तिचा प्रमुख स्रोत असणाऱ्या मोठ्या आई (महिषासुरमर्दिनी) च्या आपल्यावरील प्रेमाची सतत जाणीव ठेवून त्याबद्दल प्रेमळ कृतज्ञता बाळगूया -  ’अंबज्ञ’ होऊया.


ll हरि ॐ ll ll श्रीराम ll ll अंबज्ञ ll

नंदाईचा परिचय

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 3:00 am कोई टिप्पणी नही


गेल्या अनेक वर्षांपासून डॉ. सौ. नंदा आत्मबल विकास स्त्रियांसाठी त्यांचा आत्मविश्वास व आंतरिक शक्ती वाढवणारा उपक्रम यशस्वीरित्या संचलित करत आहेत. त्यांनी मुंबई विद्‌यापिठामधून बायोकेमिस्ट्रीमध्ये पद्व्युत्तर शिक्षण पूर्ण केले असून आयुर्वेद व निसर्गोपचार (नॅचरोपथी) ह्या विषयांवरही त्यांचे प्रभुत्व आहे. त्यांनी ब्रेल भाषेमध्येसुद्धा प्राविण्य मिळवले असून स्वत: ३ वर्षे ब्रेल भाषा शिकवली आहे.

त्यांच्याच मार्गदर्शनाखाली घेतले जाणारे हे आत्मबल वर्ग स्त्रियांची आंतरिक शक्ती व आत्मविश्वास ह्यांचा विकास घडवून ह्या दोन्ही गुणांना दृढ करतात व त्यायोगे स्त्रियांना धीट, स्वावलंबी व स्वयंपूर्ण बनण्यास मदत करून त्यांना स्वत:चीच नवी ओळख करून देतात.

इंग्रजी अजिबात येत नसणाऱ्या, अगदी गंधज्ञान नसलेल्या स्त्रियांना दैनंदिन व्यवहाराला व्यवस्थित पुरे पडावे इतके इंग्रजी डॉ. सौ. नंदा अनिरुद्ध जोशी स्वत: शिकवतात. ह्यातून ह्या स्त्रियांना इंग्रजी बोलण्याचा आत्मविश्वास मिळतो व ह्यामधील काही स्त्रिया तर हजारोंच्या संख्येने उपस्थित असलेल्या प्रेक्षकसमुहासमोर इंग्रजी नाटिकादेखिल सादर करतात.

आजच्या जगात इंग्रजी हा केवळ शिकण्याचा विषय राहिला नसून ही आता सर्वसामान्यांची एकमेकांत संवाद करण्याची भाषा झाली आहे. तेव्हा इंग्रजीचे जुजबी ज्ञान तर सर्वांनाच आवश्यक ठरते. परंतु एका बाजुला प्रवाही इंग्रजी बोलता न येण्यामुळे उत्पन्न होणारा न्यूनगंड व दुसऱ्या बाजुला शब्दकोषात कठिण शब्दांचे अर्थ शोधण्याचे कंटाळवाणे काम ह्यासारख्या अनेक गोष्टीच आवश्यकता असतानाही इंग्रजीत संवाद साधण्यापासून व असलेल्या ज्ञानाचे वर्धन करण्यापासून दूर ठेवतात.

आत्मबल वर्गांच्या संचलनाच्या अनेक वर्षांच्या अनुभवातूनच ह्या सर्व अडथळ्यांवर मात करणारी एक अतिशय सुंदर संकल्पना डॉ. सौ. नंदा अनिरुद्ध जोशी ह्यांना सुचली व अथक परिश्रमा अंती त्यांनी ह्या संकल्पनेला पुस्तकरूपात साकार केले आहे.

आत्मबल ते आत्मबदल - दुर्गावीरा वाघ (मराठी)

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 2:45 am कोई टिप्पणी नही



दुर्गावीरा वाघ (मराठी)

आत्मबल ते आत्मबदल - वीणावीरा गोकर्ण (मराठी)

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 2:40 am कोई टिप्पणी नही


वीणावीरा गोकर्ण (मराठी)

आत्मबल से आत्मबदल - प्रतीक्षावीरा शहा (हिंदी)

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 2:40 am कोई टिप्पणी नही



प्रतीक्षावीरा शहा (हिंदी)

आत्मबल से आत्मबदल

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 2:35 am कोई टिप्पणी नही

परम पूज्य आई के आशीर्वाद से मैं केसरीवीरा कुकयान बहुत भाग्यशाली थी कि मुझे 2006-07 में आत्मबल कक्षा के 9 वें बैच में सहभागी होने का सुअवसर मिला. वे पूरे छ: महीने के दौरान जो कक्षाएँ संचालित की गई थीं, वे अपने आप में एक स्वर्णिम अनुभव था. उस अवधि के दौरान अनुभव किए गए प्रेरणास्पद क्षण आज भी सजीव हो उठते हैं. प्रेम की प्रतीक परम पूज्य आई हमारी मार्गदर्शक थीं और आत्मबल कक्षा की यादें मेरे जीवन के वे अनमोल क्षण हैं जो मेरे हृदय में सदैव अंकित रहेंगे.

पब्लिक स्पीकिंग का आत्मविश्वास मुझे आत्मबल कक्षा से ही मिला. इससे मुझे स्टेज के डर पर काबू पाने में सहायता मिली. हर कार्य के प्रति मेरा दृष्टिकोण ही बदल गया और मेरी सोच सकारात्मक हो गई. मैंने साधारण घरेलू काम-काज से लेकर ऑफिस के बड़े प्रोजेक्ट्स को भी सुनियोजित तरीके से और आत्मविश्वास से करना सीख लिया. मैंने ‘बेकार’ को ‘सर्वश्रेष्ठ’ में बदलना सीख लिया. इस कक्षा ने समस्याओं से निपटने का मेरा दृष्टिकोण ही बदल दिया. अब, मैं उन्हें सकारात्मक रूप में लेती हूँ. यह कक्षा स्वयं में एक प्रबंधन कार्यक्रम थी. अंत में, इतना ही कि इससे ज़िंदगी की दिशा ही बदल गई है.

-केसरीवीरा कुकयान
गोरेगाव
[आत्मबल २००६]

आत्मबल एक प्रवास...

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 2:30 am कोई टिप्पणी नही
॥ हरि  ॐ॥

आत्मबल - एक प्रवास..................


माझ्यासाठी ‘आत्मबल’ म्हणजे......
‘एका तळ्यात होती, बदके पिल्ले सुरेख
होते कुरुप वेडे पिल्लू तयात एक’

चे रुपांतरण.......
‘एके दिनी परंतु, पिल्लास त्या कळाले,
पाण्यात पाहताना, तो राजहंस एक’


    माझ्या प्रेमळ नंदाईने ‘आत्मबल’ ला प्रवेश दिला मात्र! आणि नकारात्मकतेच्या दलदलीत अडकून घेतलेल्या पिल्लाला हात देऊन सकारात्मक ‘पल्लवीवीरा’ म्हणून घडवले. मला आता पूर्वीची मी आठवले की वाटते - खरचं, ती मीच होते का? न्यूनगंड, दु:ख, अहंकाराने भरलेली! आईने तिच्या आत्मबलाच्या वर्गामधून मला यातून पूर्ण रिकामे केले - मोकळे केले. आणि भरून टाकले तिच्या खळखळत्या ओसांडून वाहणार्‍या प्रेमाने, तिच्या भरभरून टाकणार्‍या वात्सल्याने..................

    हल्ली आपण जाहिरातींमध्ये ‘आधी’ आणि ‘नंतर’ असे फोटो पाहतो असे फोटो पाहतो ना! अगदी तसेच माझे जरी साधे ‘आत्मबल’ होण्या अगोदरचे आणि नंतरचे फोटो पाहिले ना तरी लक्षात येते औदासिन्याने ग्रासलेल्या पिल्लाला निखळ कसे बनवले आहे नंदाईने!

    आईने आत्मबल वर्ग संपताना सांगितले होते, “बाळानों, तुमच्या जीवनात हा प्रवास कधीच संपू देऊ नका. हा प्रवासच तुम्हाला सुखी करेल!”

    अंबज्ञ आई, मला या प्रवासात सामील करून घेतल्याबद्दल!!!
-पल्लवीवीरा तायशेटे
मालाड(पाश्चिम) 
[आत्मबल १९९९]
॥ हरि ॐ॥

सोमवार, 22 सितंबर 2014

परम पूज्य बापूजी का आगमन - आत्मबल २००९ - १०

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फ़ोटोज् - आत्मबल २००७ - ०८

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मंगलवार, 2 सितंबर 2014

पुणे बॅच २०१० - ११

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शुक्रवार, 22 अगस्त 2014

पुणे बॅच २०१२ - १३

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पुणे बॅच २००९ - १०

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पुणे बॅच २००८ - ०९

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पुणे बॅच २००७ - ०८

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पुणे बॅच २००६ - ०७

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पुणे बॅच २००५ - ०६

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मंगलवार, 12 अगस्त 2014

आत्मबल महोत्सव - व्हिडिओज्

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परम पूज्य अनिरुद्ध बापूजी का आगमन - महोत्सव पहला दिन



स्तवन-मोठी आई

सोमवार, 11 अगस्त 2014

फ़ोटोज् - आत्मबल महोत्सव

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फ़ोटोज् - आत्मबल २०​​१२ - १३

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फ़ोटोज् - आत्मबल २०​​१० - ११

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फ़ोटोज् - आत्मबल २००​९​ - १०

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 4:59 pm कोई टिप्पणी नही


फ़ोटोज् - आत्मबल २००८ - ०९

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 4:55 pm कोई टिप्पणी नही



फ़ोटोज् - आत्मबल २००६ - ०७

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 4:51 pm कोई टिप्पणी नही


फ़ोटोज् - आत्मबल २००५ - ०६

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 4:25 pm कोई टिप्पणी नही


फ़ोटोज् - आत्मबल २००४ - ०५

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 4:21 pm कोई टिप्पणी नही


फ़ोटोज् - आत्मबल २००३ - ०४

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 4:16 pm कोई टिप्पणी नही


फ़ोटोज् - आत्मबल २००२ - ०३

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 4:13 pm कोई टिप्पणी नही


फ़ोटोज् - आत्मबल २००१ - ०२

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 4:02 pm कोई टिप्पणी नही

फ़ोटोज् - आत्मबल १९९९ - २०००

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 3:52 pm कोई टिप्पणी नही



बुधवार, 6 अगस्त 2014

फ़ोटोज् - आत्मबल २००० - ०१

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 2:45 pm कोई टिप्पणी नही

फ़ोटोज् - आत्मबल १९९८ - ९९

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 2:35 pm कोई टिप्पणी नही


सोमवार, 21 जुलाई 2014

परम पूज्य बापूजी का आगमन - आत्मबल २००७

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शुक्रवार, 18 जुलाई 2014

आत्मबल २००७ - प्रदर्शनका व्हिडिओ

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 3:09 pm कोई टिप्पणी नही

आत्मबल २००७ के प्रदर्शनका व्हिडिओ

आत्मबल २०१० - प्रदर्शनका व्हिडिओ

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 3:08 pm कोई टिप्पणी नही
आत्मबल २०१० के प्रदर्शनका व्हिडिओ