आत्मबल परिचय

यह ब्लॉग है, 'नंदाई द्वारा हर महिला के लिए बढ़ाया हुआ प्रेम और मित्रता का हाथ.……

हमारी नंदाई

हमारी नंदाई : पिछले कई सालों से डॉ. श्रीमति नंदा अनिरुद्ध जोशी ’आत्मबल विकास’ नामक महिलाओं का आत्मविश्वास तथा आतंरिक शक्ति बढ़ानेवाला उपक्रम सफलतापूर्वक चलाती आ रही हैं। उन्होंने मुंबई...

आत्मबल २०१२ - फ़ोटोज्

आत्मबल से आत्मबदल

व्हिडिओ अनुभव - प्रतीक्षावीरा शहा

शुक्रवार, 6 जनवरी 2017

हमभी अगर बच्चे होते...

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 4:15 pm कोई टिप्पणी नही

हमभी अगर बच्चे होते...
हम जब बडे हो जाते है तो अपना बचपन भूल जाते है। पर बचपन की यादे आजभी हमारे चेहेरेपे मुस्कान ले आती है। क्योंकि जो खेल, मस्ती हम बचपन मे करते थे वो आजभी हमे ताज़ा करती है। आज भी हमे वो खेलोंसे लगाव है जो हम बचपन मे खेला करते थे। चलो देखते है हमारा बचपन इस व्हिडीयोमे...
https://www.youtube.com/watch?v=Oxc4ZFoNfo8

यही खिलखिलाते चेहरे हम देखतेहै आत्मबलमे जब परमपूज्य नंदाई ’घरके अंदर खेलेजानेवाले खेल’ लेती है। सभी सखियॊं का बचपन लौट आता है। वे पूरी तरह से खिल जाती है।

लेकिन आत्मबल कोर्स खत्म हो जाने के बाद भी हमे ये खेल खेलने चाहिये। हम सबके लिये हमारे परमपूज्य बापूने "अनिरुदाज इन्स्टिट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स ऍन्ड बोन्साय स्पोर्ट्स" की स्थापना की है। खेल खेलनेसे हम और भी तंदुरुस्त हो जाते है। मनसे भी और शरीरसे भी। चलो अब हम सब "अनिरुदाज इन्स्टिट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स ऍन्ड बोन्साय स्पोर्ट्स" के ब्लॉगको व्हिजिट करते है।


http://aniruddhabapu-bonsaisports.blogspot.in/search/label/Video%20Gallery

हम अपना बचपन तो नही लौटा सकते लेकिन बचपनके खेल जरूर खेल सकते है।













मंगलवार, 3 जनवरी 2017

सावित्रीबाई फुले

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 7:57 pm कोई टिप्पणी नही


सावित्रीबाई फुले (जनवरी ३, १८३१ - मार्च १०, १८९७)



जाओ जाकर पढ़ो-लिखो, बनो आत्मनिर्भर, बनो मेहनती

काम करो-ज्ञान और धन इकट्ठा करो

ज्ञान के बिना सब खो जाता है, ज्ञान के बिना हम जानवर बन जाते है

इसलिए, खाली ना बैठो,जाओ, जाकर शिक्षा लो

दमितों और त्याग दिए गयों के दुखों का अंत करो, तुम्हारे पास सीखने का सुनहरा मौका है

इसलिए सीखो और जाति के बंधन तोड़ दो, ब्राह्मणों के ग्रंथ जल्दी से जल्दी फेंक दो.

- सावित्रीबाई फ़ूले (मराठी कविता का हिंदी अनुवाद )


आज महिलाओने शिक्षणक्षेत्रमे जो प्रगती की है उसका श्रेय सावित्रीबाई फ़ूले इन्हे जाता है।आज सभी क्षेत्रमे महिलाये प्रगतीपथ पर है। लेकीन कई साल पहेले परिस्थिती अलग थी।  उन्नीसवीं सदी में महिलाओंपर बहुत सारी पाबंदिया थी । अज्ञानता के अंधकार, कर्मकांड, वर्णभेद, जात-पात, बाल-विवाह, मुंडन तथा सतीप्रथा आदि कुप्रथाओं से सम्पूर्ण नारी जाति ही व्यथित थी।उक्त सामाजिक बुराईयां किसी प्रदेश विशेष में ही सीमित न होकर संपूर्ण भारत में फैल चुकी थीं। सावित्रीबाई फ़ूले एक ऐसी महान महिला थी जिन्होंने  इनके विरूद्ध अपने पति के साथ मिलकर काम किया।

सावित्रीबाई का जन्म महाराष्ट्र के सतारा जिले में नायगांव नामक छोटे से गॉव में हुआ ।सावित्रीबाई फुले एक दलित परिवार में जन्मी महिला थीं, लेकिन उन्होंने उन्नीसवीं सदी में महिला शिक्षा की शुरुआत के रूप में समाज को सीधी चुनौती देने का काम किया था। इन्होंने देश की पहली भारतीय स्त्री-अध्यापिका बनने का ऐतिहासिक गौरव हासिल किया।

महाराष्ट्र के महान समाज सुधारक, विधवा पुनर्विवाह आंदोलन के तथा स्त्री शिक्षा समानता के अगुआ महात्मा ज्योतिबा फुले की धर्मपत्नी सावित्रीबाई ने अपने पति के सामजिक कार्यों में न केवल हाथ बंटाया बल्कि अनेक बार उनका मार्ग-दर्शन भी किया। 

भारत में नारी शिक्षा के लिये किये गये पहले प्रयास के रूप में महात्मा फुले ने अपने खेत में आम के वृक्ष के नीचे विद्यालय शुरु किया। यही स्त्री शिक्षा की सबसे पहली प्रयोगशाला भी थी, जिसमें सगुणाबाई क्षीरसागर व सावित्री बाई विद्यार्थी थीं। उन्होंने खेत की मिटटी में टहनियों की कलम बनाकर शिक्षा लेना प्रारंभ किया। 

धर्म-पंडितों ने उन्हें कई लांछन लगाये, यहां तक कि उनपर पत्थर एवं गोबर तक फेंका गया। भारत में ज्योतिबा तथा सावि़त्री बाई ने शुद्र एवं स्त्री शिक्षा का आंरभ करके नये युग की नींव रखी। इसलिये ये दोनों युगपुरुष और युगस्त्री का गौरव पाने के अधिकारी हुये ।

 ऐसी महान महिलाको उनके जनमदिनके अवसरपर कृतद्न्यता पूर्वक प्रणाम।



सावित्रीबाई फ़ूले के कार्य कि एक झलक इस लिंकद्वारा देखिये।



शनिवार, 4 जून 2016

 

फोर्ब्सने अमेरिका की सबसे सफल ६० महिला उद्यमियोंकी सूची जारी कि है।
इसमे दो भारतीय महिलाभी शामिल है।इनका नाम नीरजा सेठी और जयश्री उल्लाल है। 




यही नहीं फोर्ब्‍स ने इन भारतीय महिलाओं को सबसे कामयाब सेल्‍फ मेड वूमेन एंटरप्रेन्‍योर बताया है और इस बात का जिक्र किया है कि इन महिलाओं ने इन्वेंशन और इनोवेशन के जरिए बिजनेस में नई ऊंचाइयों को छुआ है।...

 
ये दोनों भारतीय महिलाएं सोशल मीडिया पर भी खासी चर्चित हैं। वे फेसबुक, ट्विटर के अलावा गूगल जैसे सर्च इंजन में चर्चा का विषय रहती हैं।

-आईटी कन्सल्टिंग एंड आउटसोर्सिंग फर्म सिन्‍टेल की कोफाउंडर भारतीय मूल की महिला नीरजा सेठी को फोर्ब्‍स ने सेल्‍फ मेड अमेरिकन वूमेन की लिस्‍ट में 16वें नंबर पर रखा है।

61
साल भारतीय महिला नीरजा सेठी की कंपनी की नेटवर्थ 1.1 अरब डॉलर है। -इतनी बड़ी नेटवर्थ के साथ इनकी कंपनी में अच्‍छे खासे वर्किंग इंप्‍लॉई कैपेसिटी है। इस समय सेठी की कंपनी में 25 हजार से ज्‍यादा इंप्‍लॉर्इ हैं। सेठी का दावा है मौजूदा समय में उनकी कंपनी की मार्केट कैप 3.6 अरब डॉलर है।

वर्तमान में वह एंटरप्रेन्‍योर होने के अलावा कई मुख्‍य जिम्‍मेदारियां भी निभाती हैं।वह इस समय कॉरपोरेट अफेयर्स की वाइस प्रेसीडेंट हैं के साथ बिजनेस डायरेक्‍टर्स बोर्ड पैनल को बखूबी रिप्रेजेंट करती हैं।

लिस्ट में 30वें पायदान पर जयश्री उल्‍लाल ...

अरिस्‍टा नेटवर्क की प्रेसीडेंट और सीईओ जयश्री उल्‍लाल (55) को 30वीं रैंक प्रदान की गई है। यूं तो भारतीय महिलाओं में चंदा कोचर, अरुंधति रॉय और इंदिरा नूई जैसी महिलाओं के नाम शामिल हैं। लेकिन देश की दूसरी सबसे धनी महिलाओं को टक्कर देना और सक्‍सेसफुल सीईओ का दर्जा मिलना उल्‍लाल के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।...

नई दिल्‍ली की जय श्री उल्‍लाल इंडियन हैं, लेकिन इनका जन्‍म अमेरिका में ही हुआ है। वह 2008 में अरिस्‍टा नेटवर्क की प्रेसिडेंट और सीर्इओ बनीं। बिजनेस खड़ा किए हुए अभी सिर्फ आठ साल बीते हैं लेकिन उन्‍होंने इतनी कम समय में अमेरिकन एंटरप्रेन्‍योर में अच्‍छा खासा नाम कमाया है। इस समय उनकी कंपनी की कुल नेटवर्थ 470 करोड़ रुपए है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक 2015 में कंपनी ने 83.8 करोड़ डॉलर का रेवेन्‍यू है। जय श्री उल्‍लाल अपनी कंपनी के कर्मचारियों के साथ केयरिंग हैं और उन्‍हें अधिक से अधिक प्रॉफि‍ट देने पर भरोसा रखती हैं।...
अरिस्‍ता नेटवर्क में उन्‍होंने इंजीनियर टीम से ज्‍यादा टेक्‍नोलॉजी टीम पर ध्‍यान दिया और टे‍क्निकल फील्‍ड में अपडेटेड टेक्‍नोलॉजी को अपनाने का प्रयास किया ताकि वह कंपनी के नेटवर्क को बेहतर टेक्‍नोलॉजी दे सके।...

http://www.bhaskar.com/news/INT-indian-origin-two-women-in-forbes-self-made-american-women-list-5339948-NOR.html

सोमवार, 23 मई 2016

बधाई !!!! इसरो के वैज्ञानिकों कों

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 5:04 pm कोई टिप्पणी नही


इसरो ने लॉन्च किया पहला 'मेड इन इंडिया' स्पेस शटल

 

 ‘RLV-TD का मुख्य लक्ष्य पृथ्वी की कक्षा में उपग्रह पहुंचाना और फिर वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करना है. शटल को एक ठोस रॉकेट मोटर से ले जाया जाएगा. नौ मीटर लंबे रॉकेट का वजन 11 टन है.'

पीएम ने दी बधाई
पीएम मोदी ने भी ट्वीट कर वैज्ञानिकों को इसके लिए बधाई दी. पीएम ने कहा भारत के पहले स्वदेशी अंतरिक्ष शटल RLV-टीडी की लॉन्चिंग हमारे वैज्ञानिकों के मेहनती प्रयासों का परिणाम है. गतिशीलता और समर्पण के साथ जो हमारे वैज्ञानिकों और इसरो ने पिछले कुछ सालों में काम किया है, वह असाधारण और बहुत ही प्रेरणादायक है.

इस स्पेस क्राफ्ट को बनाने में 600 वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने दिन-रात की मेहनत की है.

ये होगा फायदा
इसरो के साइंटिस्टों का मानना है कि वे इस स्पेस क्राफ्ट के लॉन्च और सफल होने के बाद सैटेलाइट्स आदि को स्पेस में लॉन्च करने में होने वाले खर्च को 10 गुना कम कर लिया जाएगा.


http://aajtak.intoday.in/story/isro-launches-rlv-td-fully-made-in-india-space-shuttle-1-870346.html