शनिवार, 17 अक्तूबर 2015

महाराष्ट्र के पारंपारिक खेल

इसे प्रकाशित किया Aatmabal ने तारीख और समय 1:02 pm कोई टिप्पणी नही
त्योहारोमें से एक है 'मंगलागौर'। यह त्योहार अभी लुप्त होने के सीमा पर है। आत्मबल बैच १९९८  के समाप्ती के अवसर पर  प. पू. नंदाई ने 'मंगलागौर' का विशेष तौर पर आयोजन किया था। सभी सखियां प. पू. नंदाई के साथ उन खेलों में शामिल होकर अपने आप को भूल बैठी । मानो उनके बीते हुए दिन वापस आए हो, इस प्रकार उन्हों ने इस खेल का आनंद लिया। इतना ही नहीं, महाराष्ट्र के घर घर में खेले जानेवाले 'भोंडला' इस  मराठी खेल का भी मजा उस दिन सभी सखियोंने प. पू. नंदाई के साथ लुटा।






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